कश्मीर आतंकवाद: इतिहास, वर्तमान और समाधान की राहलेखक: मलखान सिंह भदौरिया

प्रस्तावना:

कश्मीर, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है, पिछले कई दशकों से आतंकवाद की आग में झुलस रहा है। यह संघर्ष केवल एक भौगोलिक सीमा विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक, धार्मिक, सामरिक और मानवाधिकारों से जुड़ी एक जटिल समस्या बन चुका है। 1989 के बाद से घाटी में आतंकवाद ने जिस तरह से पैर पसारे, उसने न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती दी, बल्कि हजारों निर्दोष नागरिकों और सैनिकों की जान भी ली।

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: आतंकवाद की जड़ें

कश्मीर समस्या की जड़ें भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से जुड़ी हैं। 1947 में जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरिसिंह ने भारत में विलय का निर्णय लिया, लेकिन पाकिस्तान ने इस निर्णय को कभी स्वीकार नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप 1947, 1965 और 1971 में भारत-पाक के बीच युद्ध हुए और पाकिस्तान ने कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया जिसे 'पाक-अधिकृत कश्मीर' (PoK) कहा जाता है।

1980 के दशक के अंत में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में "छद्म युद्ध" (proxy war) शुरू किया। सीमा पार से आतंकियों को ट्रेनिंग देकर भारतीय सीमा में भेजा जाने लगा। 1989 में यह आतंकवाद चरम पर पहुंचा, जब घाटी से कश्मीरी पंडितों का नरसंहार और पलायन हुआ। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को समर्थन देना शुरू कर दिया।

2. वर्तमान परिदृश्य: बदलते चेहरे और भारत की जवाबी रणनीति

आज कश्मीर आतंकवाद के कई रूप सामने आ चुके हैं – स्थानीय युवाओं की कट्टरपंथी सोच, सोशल मीडिया द्वारा ब्रेनवॉश, पत्थरबाजी, आईईडी हमले और आत्मघाती हमले। बुरहान वानी जैसे चरमपंथी युवाओं को नायक बनाने की कोशिशों ने घाटी के युवाओं को गुमराह किया।

भारत सरकार ने इस चुनौती का जवाब कई स्तरों पर दिया:

सर्जिकल स्ट्राइक (2016): उरी हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया।

बालाकोट एयरस्ट्राइक (2019): पुलवामा हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी कैंप को ध्वस्त किया।

अनुच्छेद 370 का निरसन (2019): केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया, जिससे वहां पूरी तरह से भारतीय संविधान लागू हो गया।

3. पाकिस्तान की भूमिका और वैश्विक दृष्टिकोण

पाकिस्तान लगातार कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है, लेकिन वैश्विक समुदाय अब पाकिस्तान की 'आतंकवाद पोषक' छवि को पहचान चुका है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) द्वारा पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला जाना इसका प्रमाण है।

संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका जैसे देश अब स्पष्ट रूप से मानते हैं कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई न्यायसंगत है।
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4. घाटी के आम नागरिक: सबसे बड़ा शिकार

इस संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान वहां के आम नागरिकों को हुआ है – चाहे वो हिंदू हों या मुस्लिम। बच्चों की शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं का भविष्य – सबकुछ अनिश्चितता के घेरे में रहा।

कश्मीरी पंडितों का पलायन भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा सांप्रदायिक विस्थापन माना जाता है। आज भी हजारों परिवार अपने घर लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं।
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5. समाधान की राह: शांति और विकास ही विकल्प

कश्मीर समस्या का स्थायी समाधान तीन स्तंभों पर आधारित हो सकता है:

राष्ट्रीय एकता और सख्ती: आतंकवाद के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति जारी रखनी चाहिए। सीमा पार घुसपैठ पर पूरी तरह रोक लगे।

युवा सशक्तिकरण और रोजगार: कट्टरपंथ को तभी हराया जा सकता है जब युवाओं को रोजगार, शिक्षा और भविष्य मिलेगा।

जनभागीदारी और संवाद: स्थानीय नागरिकों को विश्वास में लेकर, शांति की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं।

---निष्कर्ष:

कश्मीर केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। आतंकवाद से लड़ाई केवल सैन्य नहीं, वैचारिक और सामाजिक भी है। कश्मीर की धरती फिर से गुलजार हो, वहां के बच्चे फिर से मुस्कराएं, और आतंक की जगह अमन और तरक्की का राज हो – यही हर भारतीय की सच्ची आकांक्षा है।

– मलखान सिंह भदौरिया

Malkhan Singh Bhadoriya | मलखान सिंह भदौरिया

l राजनैतिक जीवन- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के लोकप्रिय नेता व मेरे पसंदीदा नेता श्रीज्योतिरादित्य सिंधिया जी है जिनसे प्रभावित हो मैने तय किया कि मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दल की ही सदस्यता लूँगा और वर्ष 2001 मे मैने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जिसमे कांग्रेस छोड़कर कल्पना पारुलकर जी ने जॉइन कर ली थी राष्ट्रवादी कांग्रेस के चंबल ग्वालियर के लगभग 100 से अधिक पदाधिकारी गण श्रीसिंधिया जी से प्रभावित हो वर्ष 2002 में कांग्रेस मे शामिल हो गये इन 100 पदाधिकारीयों मे मलखानसिंह ने भी श्रीसिंधिया जी के समक्ष कांग्रेस जॉइन में कांग्रेस जॉइन कर ली वर्ष 2004 मे मलखानसिंह भदौरिया जिला युवक कांग्रेस भिण्ड की कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष रहे फिर वर्ष 2006 में जिला कांग्रेस ग्रामीण में वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में अटेर से निर्वाचित हुए पूर्व मंत्री श्री सत्यदेव कटारे जी ने मलखानसिंह को विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किया वर्ष 2016 में मलखानसिंह को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सेवा इकाई मैं भिण्ड-दतिया जिले का समन्वयक नियुक्त किया गया मलखानसिंह की निरंतर सक्रियता के कारण उन्हें वर्ष 2017 में किसान कांग्रेस मप्र का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया

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