मध्य प्रदेश में बहनों पर दोहरी दरिंदगी: क्या कानून सो रहा है?
✍🏻 लेखक: मलखान सिंह भदौरिया
मध्य प्रदेश को देवों की धरती और शांति का प्रदेश कहा जाता है, लेकिन बीते सप्ताह दो ऐसी वीभत्स घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने इस छवि को तार-तार कर दिया। भोपाल में एक कॉलेज छात्रा को प्रेमजाल में फंसा कर सामूहिक दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया। वहीं खंडवा जिले में एक आदिवासी महिला के साथ बर्बरता की सारी सीमाएं पार कर दी गईं—गैंगरेप के बाद उसके प्राइवेट पार्ट में सरिया डाल दिया गया, जिससे उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
(प्रतीकात्मक चित्र – महिला हिंसा का विरोध करता प्रतीक)
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रदेश की बेटियाँ न घर में सुरक्षित हैं, न बाहर। और जब शासन सत्ता मौन है, तब प्रश्न उठता है—क्या बेटियाँ अब भी सुरक्षित हैं?
पहला घाव: भोपाल की बेटी से ब्लैकमेल, गैंगरेप और धर्मांतरण का दबाव
राजधानी भोपाल में एक शिक्षित कॉलेज छात्रा को पहले प्रेमजाल में फंसाया गया। आरोपी फरहान अली नामक युवक ने प्यार का नाटक कर छात्रा की निजी तस्वीरें ले लीं, फिर उन्हें वायरल करने की धमकी देकर लगातार कई महीनों तक उसका यौन शोषण करता रहा। यही नहीं, उसे अपने दोस्तों के साथ शारीरिक संबंध बनाने को मजबूर किया गया। बाद में उस पर जबरन धर्म बदलने का दबाव भी बनाया गया।
दूसरा घाव: खंडवा की आदिवासी महिला से दरिंदगी की हदें पार
23 मई 2025 की रात खंडवा जिले के खालवा क्षेत्र में एक आदिवासी महिला शादी से लौट रही थी। दो दरिंदों—हरी पालवी और सुनील धुर्वे—ने पहले उसे अपने घर बुलाया, शराब पिलाई, फिर बारी-बारी से बलात्कार किया। इस दौरान उन्होंने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में सरिया डाल दिया, जिससे उसकी आंतें बाहर आ गईं। कुछ ही घंटों में वह अत्यधिक रक्तस्राव से तड़पकर मर गई।
📢 जीतू पटवारी का बयान
— जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
क्या सरकार की संवेदनाएं मर चुकी हैं?
इन दोनों मामलों में अपराधियों की मानसिकता, प्रदेश की कानून व्यवस्था और सरकार की निष्क्रियता तीनों को कठघरे में खड़ा करती हैं। क्या एक छात्रा को धर्मांतरण के लिए दबाव बनाना कोई साधारण अपराध है? क्या आदिवासी महिला की मौत महज एक आंकड़ा है?
न्याय की प्रतीक्षा में बेटियाँ
भोपाल की छात्रा आज समाज के बीच शर्मिंदगी और भय के साथ जी रही है। खंडवा की पीड़िता तो दुनिया छोड़ गई, लेकिन उसके परिवार की चीखें प्रशासन और समाज को झकझोर रही हैं।
समापन विचार: कब जागेगा मध्य प्रदेश?
जब तक सरकार अपराधियों के खिलाफ त्वरित, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई नहीं करती, तब तक ऐसे अपराध रुकने वाले नहीं हैं। बेटियों की आहें और माँओं की चीखें अगर सत्ता के गलियारों में न गूंजें, तो यह प्रदेश अधर में लटकता रहेगा।
अब समय है कि शासन और समाज दोनों एकजुट होकर आवाज उठाएं—"बेटी की अस्मिता, राजनीति से ऊपर है!"