न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह: एक पीड़ित की आत्मकथा

न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह: एक पीड़ित की आत्मकथा

लेखक: मलखान सिंह भदौरिया, समाजसेवी, भिंड

वर्ष 2017, मेरे जीवन का वह दुर्भाग्यपूर्ण मोड़ था, जिसकी मैंने कभी कल्पना तक नहीं की थी। एक सामान्य, महत्वाकांक्षी, समाजसेवा के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति अचानक न्याय प्रणाली की जकड़ में ऐसा फंसा कि उसका पूरा जीवन ही बदल गया। मेरा राजनीतिक सफर, मेरी सामाजिक पहचान, मेरा सम्मान—सब एक ही दिन में धूमिल हो गया।

मैंने जीवन में राजनीति को समाज सेवा का माध्यम बनाया था, लेकिन पारिवारिक विवाद और उसकी भयावह परिणति ने मुझे एक अपराधी की तरह कठघरे में खड़ा कर दिया। यह कोई असामान्य कहानी नहीं है—यह उस हर व्यक्ति की कहानी है जो न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र की खामियों का शिकार हुआ है।

न्याय नहीं, न्याय का मज़ाक

17 नवंबर 2017, वह दिन था जब मुझे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और मैं ग्वालियर केंद्रीय जेल में दाखिल हुआ। जेल की सलाखों के पीछे मैंने देखा—वहाँ केवल अपराधी नहीं, बल्कि सैकड़ों निर्दोष युवक भी बंद थे। वे सब मेरी तरह ही सिस्टम की त्रुटियों का शिकार थे।

जब एक व्यक्ति दोषी ठहराया जाता है, तब उसका झूठ बोलना भी व्यर्थ होता है। फिर भी जब वे युवक कहते हैं कि वे निर्दोष हैं, तो उनकी आंखों में वह सच्चाई साफ झलकती है जिसे अदालत नहीं देख सकी।

अन्वेषण या पक्षपात?

हमारे देश की न्याय व्यवस्था इस कदर कमजोर हो चुकी है कि अब यह पूरी तरह से पुलिस के पहले स्तर की विवेचना पर आधारित हो गई है। और पुलिस? उसका चरित्र हम सब जानते हैं—अक्सर भ्रष्टाचार, राजनीतिक दबाव और धनबल के सामने झुकने वाली संस्था।

सोचिए, जब किसी केस की बुनियाद ही झूठ और दबाव में की गई हो, तो उस पर खड़ा किया गया न्याय का भवन कैसे निष्पक्ष हो सकता है? अन्वेषण वह आधार है जिस पर निर्णय होता है, और जब यह आधार ही दूषित हो, तो न्याय एक भ्रम बनकर रह जाता है।

न्यायपालिका के दोहरे मापदंड

आज की स्थिति यह है कि किसी बड़े व्यक्ति पर आरोप लगे तो महीनों तक अदालतें उसे राहत नहीं देतीं, लेकिन सत्ता पक्ष के लोग, जिन पर गंभीर अपराध हैं, वे चंद दिनों में जमानत पा जाते हैं। न्यायपालिका का यह दोहरा मापदंड आज आम जनता के भरोसे को तोड़ रहा है।

मीडिया ट्रायल और सरकारी बर्बरता

डिजिटल युग में मीडिया और सोशल मीडिया ने न्याय से पहले ही निर्णय देना शुरू कर दिया है। केवल आरोप लगते ही सरकारें बुलडोजर चलवा देती हैं, एनकाउंटर करवा देती हैं, बिना यह देखे कि मामला अभी न्यायपालिका तक पहुंचा भी है या नहीं।

अगर बाद में आरोपी निर्दोष सिद्ध हो जाए, तो क्या सरकार उसका जीवन लौटा सकती है? क्या उस टूटे घर को वही पुराना सम्मान मिल सकता है? क्या उसके बच्चों को समाज में दोबारा स्वीकार किया जाएगा?

कठोर कानूनों का दुरुपयोग

आज कई कठोर कानून बनाए जा रहे हैं—लेकिन वे कानून न्याय के लिए कम, प्रतिशोध के लिए ज़्यादा उपयोग में लाए जा रहे हैं। बलात्कार जैसे मामलों में फर्जी आरोपों की बाढ़ आ चुकी है। कुछ गिरोह ऐसे बन चुके हैं जो पैसे लेकर निर्दोष लोगों को फँसाते हैं। क्या यही कानून का राज है?

समाधान क्या है?

मेरा स्पष्ट मानना है कि हर विवेचना के दौरान पुलिस के साथ एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी या मानवाधिकार संस्था का प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से जुड़ा होना चाहिए। जब तक अन्वेषण को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं बनाया जाएगा, तब तक न्याय एक दुर्लभ वस्तु बनी रहेगी।

आज जरूरत है उस न्याय प्रणाली की, जो केवल अमीरों, नेताओं या प्रभावशाली लोगों की कठपुतली न हो, बल्कि हर सामान्य नागरिक को यह विश्वास दे कि उसके साथ भी न्याय होगा।
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निष्कर्ष
इस लेख के माध्यम से मेरा उद्देश्य किसी संस्था को बदनाम करना नहीं, बल्कि उस पीड़ा को साझा करना है जो मैंने और मेरे जैसे हजारों निर्दोषों ने महसूस की है। न्याय केवल एक प्रक्रिया नहीं है, यह एक भाव है—और जब यह भाव मर जाता है, तो समाज बर्बादी की ओर बढ़ता है।

– मलखान सिंह भदौरिया
समाजसेवी, भिंड



Malkhan Singh Bhadoriya | मलखान सिंह भदौरिया

l राजनैतिक जीवन- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के लोकप्रिय नेता व मेरे पसंदीदा नेता श्रीज्योतिरादित्य सिंधिया जी है जिनसे प्रभावित हो मैने तय किया कि मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दल की ही सदस्यता लूँगा और वर्ष 2001 मे मैने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जिसमे कांग्रेस छोड़कर कल्पना पारुलकर जी ने जॉइन कर ली थी राष्ट्रवादी कांग्रेस के चंबल ग्वालियर के लगभग 100 से अधिक पदाधिकारी गण श्रीसिंधिया जी से प्रभावित हो वर्ष 2002 में कांग्रेस मे शामिल हो गये इन 100 पदाधिकारीयों मे मलखानसिंह ने भी श्रीसिंधिया जी के समक्ष कांग्रेस जॉइन में कांग्रेस जॉइन कर ली वर्ष 2004 मे मलखानसिंह भदौरिया जिला युवक कांग्रेस भिण्ड की कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष रहे फिर वर्ष 2006 में जिला कांग्रेस ग्रामीण में वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में अटेर से निर्वाचित हुए पूर्व मंत्री श्री सत्यदेव कटारे जी ने मलखानसिंह को विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किया वर्ष 2016 में मलखानसिंह को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सेवा इकाई मैं भिण्ड-दतिया जिले का समन्वयक नियुक्त किया गया मलखानसिंह की निरंतर सक्रियता के कारण उन्हें वर्ष 2017 में किसान कांग्रेस मप्र का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया

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