🔱 लिंग और योनि: सृष्टि के पवित्र द्वार की पूजा क्यों?


🔱 लिंग और योनि: सृष्टि के पवित्र द्वार की पूजा क्यों?
— एक वैदिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण
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🌿 प्रस्तावना:

मनुष्य का शरीर ईश्वर की सबसे सुंदर रचना है। इसमें हर अंग की भूमिका है, पर कुछ अंग ऐसे हैं जिनसे सृष्टि चलती है — लिंग और योनि। आधुनिक समाज ने इन्हें शर्म और अशिष्टता से जोड़ दिया, जबकि प्राचीन भारत ने इन्हें पूज्य माना।---

🔱 1. शिवलिंग: सृजन का प्रतीक

"लिंग" का अर्थ है — चिन्ह या प्रतीक।

शिवलिंग में केवल शिव का नहीं, संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है।

उसका आधार (पिण्डिका) शक्ति (स्त्री ऊर्जा) का प्रतीक है, और ऊपर उठा हुआ भाग पुरुष ऊर्जा (शिव) का।


> शिवलिंग = पुरुष और स्त्री ऊर्जा के संयोग से उत्पन्न सृष्टि का प्रतीक।
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🕉️ 2. योनि पूजा: शक्ति का सम्मान

योनि को "भग" कहा गया है, जिससे “भगवान” शब्द बना।

कामाख्या मंदिर (असम), गुप्तेश्वरी (नेपाल), और कई तांत्रिक पीठों में योनि की पूजा होती है।

योनि वह द्वार है जहां से हर मानव, हर जीव का जन्म होता है।


> इसलिए यह गंदा नहीं, ईश्वर के सृजन का द्वार है — पूज्य है।
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🧘‍♂️ 3. तंत्र और वैदिक दृष्टिकोण

तंत्र साधना में “शिव” और “शक्ति” का एकत्व ही ब्रह्मांड की सच्चाई है।

तांत्रिक पूजन में लिंग और योनि को प्रतीक मानकर पूजा होती है — कोई अश्लीलता नहीं, केवल ऊर्जा और सृजन का पूजन।
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⚔️ 4. कैसे बना ये विषय "अशिष्ट"?

विदेशी आक्रमण (मुगल, ब्रिटिश) ने भारतीय संस्कृति को “अश्लील” कहकर बदनाम किया।

उन्होंने देवी-देवताओं की मूर्तियों को नष्ट किया, और शरीर के पवित्र अंगों को शर्म का विषय बना दिया।

औपनिवेशिक शिक्षा ने भी शरीर को "पाप" और "गंदा" समझने की सोच पैदा की।---

🌼 5. भारतीय सोच: जहाँ शरीर भी ईश्वर है

> "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्"
— यह शरीर ही धर्म पालन का पहला साधन है।

हमारे ऋषियों ने सिखाया कि शरीर के हर अंग में ईश्वर है।

फिर लिंग या योनि को अपवित्र मानना — यह हमारी संस्कृति का अपमान है।

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🪔 निष्कर्ष:

प्रतीक क्या दर्शाता है क्यों पूज्य है

लिंग शिव, पुरुष ऊर्जा, सृजन का बीज जीवन के आरंभ का प्रतिनिधि
योनि (भग) शक्ति, स्त्री ऊर्जा, जन्मद्वार हर मानव के आगमन का द्वार


> जिस द्वार से संसार आता है, उसे अपवित्र नहीं कहा जा सकता।
जो अंग जीवन रचते हैं, वे केवल शरीरिक नहीं, ब्रह्मांडीय ऊर्जा के स्रोत हैं।
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🙏 अंतिम संदेश:

शिवलिंग और भग पूजा कोई अश्लीलता नहीं है। यह हमारी संस्कृति, तंत्र, और दर्शन की पराकाष्ठा है — जहाँ जीवन, सृष्टि और ऊर्जा के मूल को ईश्वर माना गया है।

👉 अब समय है कि हम फिर से अपने संस्कारों को समझें, और दुनिया को बताएं कि भारत का दर्शन कितना ऊँचा था — जहां सृजन को अपवित्र नहीं, ईश्वर माना गया।

Malkhan Singh Bhadoriya | मलखान सिंह भदौरिया

l राजनैतिक जीवन- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के लोकप्रिय नेता व मेरे पसंदीदा नेता श्रीज्योतिरादित्य सिंधिया जी है जिनसे प्रभावित हो मैने तय किया कि मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दल की ही सदस्यता लूँगा और वर्ष 2001 मे मैने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जिसमे कांग्रेस छोड़कर कल्पना पारुलकर जी ने जॉइन कर ली थी राष्ट्रवादी कांग्रेस के चंबल ग्वालियर के लगभग 100 से अधिक पदाधिकारी गण श्रीसिंधिया जी से प्रभावित हो वर्ष 2002 में कांग्रेस मे शामिल हो गये इन 100 पदाधिकारीयों मे मलखानसिंह ने भी श्रीसिंधिया जी के समक्ष कांग्रेस जॉइन में कांग्रेस जॉइन कर ली वर्ष 2004 मे मलखानसिंह भदौरिया जिला युवक कांग्रेस भिण्ड की कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष रहे फिर वर्ष 2006 में जिला कांग्रेस ग्रामीण में वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में अटेर से निर्वाचित हुए पूर्व मंत्री श्री सत्यदेव कटारे जी ने मलखानसिंह को विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किया वर्ष 2016 में मलखानसिंह को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सेवा इकाई मैं भिण्ड-दतिया जिले का समन्वयक नियुक्त किया गया मलखानसिंह की निरंतर सक्रियता के कारण उन्हें वर्ष 2017 में किसान कांग्रेस मप्र का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया

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