सत्ता पक्ष के टारगेट पर रहे ज़मीनी बूथ लेवल के कांग्रेस कार्यकर्ता: उन्हें सहारा दो, मोहब्बत मारो नहीं… वरना पार्टी जड़ों से कटती जाएगी
✍ लेखक: मलखान सिंह भदौरिया
पूर्व प्रदेश महासचिव, मध्य प्रदेश किसान कांग्रेस
निवासी: अटेर भिंड, मध्य प्रदेश
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"राजकुमार हैं, जनता से दूर हैं, महलों में पले हैं…"
ये शब्द वर्षों से राहुल गांधी को सुनाए जाते रहे। लेकिन जब उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत जोड़ो यात्रा की, तो उन्होंने सिर्फ अपने आलोचकों को ही नहीं, पूरे देश को यह बताया कि वह एक ऐसे नेता हैं जो देश की आत्मा को छूना जानते हैं।
राहुल गांधी ने ज़मीनी सच्चाई को महसूस किया। उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक खानदानी नेता नहीं, बल्कि ज़मीनी जुझारू हैं — जो भारत के हर दर्द को समझते हैं।
लेकिन क्या यही काफी है?
अब ज़रूरत है कांग्रेस पार्टी के भीतर “ऑपरेशन ज़मीन” की।
देशभर में हजारों बूथ लेवल कार्यकर्ता, जिन्होंने संकट के समय भी कांग्रेस का झंडा उठाए रखा, आज अकेले हैं। जब सत्ता पक्ष इन पर झूठे मुकदमे दर्ज करता है, दबाव बनाता है, अपमानित करता है — तो हमारे जिले और प्रदेश स्तर के बड़े नेता चुप हो जाते हैं।
कुछ नेता मीडिया के सामने यहां तक कह देते हैं:
> "अब वो व्यक्ति कांग्रेस का सदस्य नहीं रहा।"
यह सबसे बड़ी राजनीतिक और नैतिक कायरता है।
कांग्रेस को समझना होगा:
ये कार्यकर्ता कांग्रेस की रीढ़ हैं,
ये लोग हर चुनाव में बूथ का युद्ध लड़ते हैं,
ये वही हैं जो सत्ता पक्ष के हथियारों के सामने खड़े रहते हैं,
और यही वो लोग हैं जिन्हें संकट के समय सहारा नहीं, बल्कि उपेक्षा मिलती है।
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राहुल गांधी जी से सीधी अपील
अब समय है कि राहुल गांधी जी पार्टी के सभी प्रदेश और जिला स्तरीय नेताओं को सख्त निर्देश दें कि:
जो कार्यकर्ता सत्ता पक्ष के दबाव में फंसाया जाए, उसका कानूनी और सामाजिक समर्थन किया जाए।
उसके परिवार की चिंता की जाए।
जो कार्यकर्ता बूथ पर पार्टी के लिए लड़ा, उसे पार्टी का हीरो माना जाए, बोझ नहीं।
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यदि ऐसा नहीं हुआ तो?
पार्टी में नेता रह जाएंगे, लेकिन कार्यकर्ता छूट जाएंगे।
लोग SUVs में बैठकर मीटिंग करेंगे,
लेकिन पोलिंग बूथ पर कांग्रेस का झंडा थामने वाला सिपाही
या तो जेल में होगा, या भाजपा के डर से चुप।
15 सालों में कांग्रेस ने अपनी जमीन खोई है —
क्योंकि पार्टी ने ज़मीन वालों को ही खो दिया।
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अंतिम बात:
सत्ता पक्ष के डर से नहीं,
अपने कार्यकर्ता की वफादारी के सम्मान में खड़े होइए।
वरना कांग्रेस सिर्फ एक पेड़ रहेगी, जिसकी जड़ें धीरे-धीरे सड़ जाएंगी।
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✍ मलखान सिंह भदौरिया
पूर्व प्रदेश महासचिव
मध्य प्रदेश किसान कांग्रेस
निवासी: डोंगरपुरा, अटेर ज़िला भिंड (म.प्र.)